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वोक्सवैगन के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है, अधिकारियों ने चेतावनी दी।

वोक्सवैगन के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है, अधिकारियों ने चेतावनी दी।

जर्मनी की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी Volkswagen के भीतर चल रहा संकट बाजार विश्लेषकों की पहले की अपेक्षाओं से कहीं अधिक गहरा और गंभीर है। जर्मन पत्रिका Der Spiegel के अनुसार, कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन के एक गोपनीय और गुमनाम सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि कंपनी की वर्तमान वित्तीय और परिचालन स्थिति अत्यंत चिंताजनक चरण में पहुंच चुकी है।

पत्रिका के अनुसार, प्रबंधन बोर्ड के वर्तमान नौ सदस्यों में से छह ने आधिकारिक रूप से स्थिति को "कंपनी के अस्तित्व के लिए खतरा" बताया। शेष तीन अधिकारियों ने हालात को "तनावपूर्ण" कहा, जबकि किसी भी उत्तरदाता ने समस्याओं को "गैर-गंभीर" नहीं माना।

अस्थिरता का मुख्य कारण प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वोक्सवैगन की स्थिति का तेजी से कमजोर होना है। बंद सर्वेक्षण में शामिल सभी नौ अधिकारियों ने सर्वसम्मति से माना कि कंपनी को चीन और उत्तरी अमेरिका में तत्काल और व्यापक संरचनात्मक बदलावों की आवश्यकता है। इन क्षेत्रों में वोक्सवैगन स्थानीय प्रतिस्पर्धियों और इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के सामने तेजी से बाजार हिस्सेदारी खो रही है।

शीर्ष प्रबंधन स्तर पर इस प्रकार की एकमत राय यह संकेत देती है कि निकट भविष्य में समूह की वैश्विक निवेश और उत्पाद रणनीति में बड़े और कठोर बदलाव लगभग तय हैं।

वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए वोक्सवैगन प्रबंधन ने पहले ही एक व्यापक मितव्ययिता (Austerity) कार्यक्रम शुरू कर दिया है। लागत कम करने की योजना के तहत कंपनी अभूतपूर्व स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है।

योजना के अनुसार, केवल जर्मनी स्थित उसके कारखानों और कार्यालयों में ही 2026 के अंत तक लगभग 19,000 नौकरियां समाप्त कर दी जाएंगी।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वोक्सवैगन जैसी औद्योगिक दिग्गज कंपनी गहरे संकट में फंसती है, तो इसका जर्मनी के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र पर गंभीर आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है और देश के भीतर सामाजिक तनाव भी बढ़ सकते हैं।

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