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जेपीमॉर्गन ने चेतावनी दी है कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती है, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ने की संभावना है।

जेपीमॉर्गन ने चेतावनी दी है कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती है, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ने की संभावना है।

अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते में प्रगति होने के कारण आने वाले हफ्तों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। ब्लूमबर्ग द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जेपीमॉर्गन एसेट मैनेजमेंट की मुख्य बाजार रणनीतिकार कैरेन वार्ड का अनुमान है कि जून के अंत तक ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 70 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकता है। वर्तमान में तेल लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, इसलिए अल्पकालिक अवधि में लगभग 13 डॉलर की गिरावट संभव है। यह बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजार में शक्ति संतुलन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है।

वार्ड के अनुसार, कीमतों में संभावित तेज गिरावट का मुख्य कारण मध्य पूर्व के कच्चे तेल के उत्पादन और निर्यात का फिर से शुरू होना है। यह प्रक्रिया होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने से संभव होगी, जो क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन धमनियों में से एक है। अतिरिक्त तेल आपूर्ति से वर्तमान आपूर्ति कमी (Supply Deficit) तेजी से कम हो सकती है और कीमतें धीरे-धीरे संकट-पूर्व दीर्घकालिक स्तरों की ओर लौट सकती हैं।

सोमवार, 15 जून की रात इस समझौते के विवरण सामने आने के बाद बाजारों में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट तेल की कीमतें गिरकर इस वर्ष 10 मार्च के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं।

वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते की एक प्रमुख शर्त यह थी कि ईरान भविष्य में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अवरुद्ध नहीं करेगा और विदेशी तेल टैंकरों के सुरक्षित आवागमन के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क भी नहीं लेगा। इस फैसले से पिछले चार महीनों के संघर्ष के दौरान तेल की कीमतों में शामिल भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (Geopolitical Risk Premium) काफी हद तक कम हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में समुद्री परिवहन के स्थिर होने से वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) के दबाव में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इसके परिणामस्वरूप दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती की अपनी योजनाओं पर फिर से गंभीरता से विचार कर सकते हैं।

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